सरकार ग़ौसे आज़म रदीयल्लाहु ताआला अन्हु की शाने अज़मत अपने अपने दौर में आकाबिर ओलिया उज़्ज़ाम ने दी

जीलानी ताजदार सरकार ग़ौसे आज़म रदीयल्लाहु ताआला अन्हु की शाने अज़मत की बशारत अपने अपने दौर में आकाबिर ओलिया उज़्ज़ाम ने दी

हज़रत ताजुल आरेफीन अबुल वफा काकैस रदीयल्लाहु ताआला अन्हु जो ईराक़ के सय्यदुल मशाइख और अमीरूल ओलिया हैं जिनके मुरीदों मे 17 बादशाह भी थे जो आपके झंडे के नीचे मुअदबाना चला करते थे और जिनका क़ौल था के

कोई इन्सान उस वक़्त तक सज्जादए मशीखियत पर बैठने के क़ाबिल नहीं होता जब तक उसको काफ से क़ाफ तक का इल्म ना हासिल हो जाए

लोगों ने अर्ज़ की के हुज़ूर काफ से क़ाफ तक के इल्म का क्या मतलब है तो फरमाया के काफ से मुराद

कुन फ य कून है

और क़ाफ से

व क़े फू हुम इन न हुम मसऊलून है

यानी क़यामत का दिन

मतलब ये के अज़ल से क़यामत तक का इल्म जब तक मिन जानिब अल्लाह कशफ से ना हासिल हो जाए उसको शैख बनकर सज्जादा नशीन नहीं होना चाहिए

हज़रत ताजुल आरेफीन अबुल वफा मुहम्मद काकैस रदीयल्लाहु ताआला अन्हु के वअज़ सुनने के लिए हज़ारों बन्दगाने खुदा सामईन बनकर हाज़िर होते थे ये वो दौर था के जीलानी ताजदार सरकार ग़ौसे आज़म एक तालिबे इल्म थे नौजवानी का आलम था

एक दिन जीलानी सरकार भी आपका वअज़ सुनने के लिए गए जैसे ही मजलिस में बैठे हज़रत ताजुल आरेफीन अबुल वफा मुहम्मद काकैस रदीयल्लाहु ताआला अन्हु की नज़र आप पर पड़ी तो आपने हाज़रीन को हुक्म दिया के इस लड़के को बाहर निकाल दो आपका हुक्म पाते ही लोगों ने जीलानी सरकार ग़ौसे आज़म रदीयल्लाहु ताआला अन्हु को मजलिस से बाहर कर दिया सरकार ग़ौसे आज़म बिल्कुल भी रंजीदा नहीं हुए बल्कि फिर मजलिस में लोटकर आ गए हज़रत ताजुल आरेफीन ने फिर हुक्म दिया इस लड़के को बाहर निकाल दो फिर आपको बाहर कर दिया गया

तमाम हाज़रीन हैरत से देखने लगे के अजीब लड़का है बार-बार बाहर मजलिस से निकाला जाता है मगर फिर चला आता है तीसरी बार सय्यदना जीलानी सरकार फिर मजलिस में दाखिल हुए मगर अबकी मर्तबा हज़रत ताजुल आरेफीन अबुल वफा मुहम्मद काकैस रदीयल्लाहु ताआला अन्हु ने फरमाया के

लोगों उस लड़के को मेरे पास लाओ लोग आपको पकड़कर कुर्सी के पास ले गए तो हज़रत ताजुल आरेफीन अबुल वफा मुहम्मद काकैस रदीयल्लाहु ताआला अन्हु
ने खड़े होकर हज़रत ग़ौसे आज़म रदीयल्लाहु ताआला अन्हु की पैशानी को चूमा फिर इरशाद फरमाया के

अए लोगो मेने दो मर्तबा इस लड़के को मजलिस से बाहर इस लिए किया था के तुम जान लो पहचान लो के ये कोन है अए अहले बग़दाद तुम लोग इस वली की ताज़ीम के लिए खड़े हो जाओ इसलिए के यही वो हैं जो मेरे बाद क़ुतुब होने वाले हैं

आपने फिर अपना असा तस्बीह मुसल्ला सज्जादा वगैरह अता फरमाकर इरशाद फरमाया के बेटा अब्दुल क़ादिर अभी तुम्हारा लड़कपन है और हमारा बुढ़ापा है बेटा मेरी आंखें देख रही हैं के

एक वक़्त ऐसा आने वाला है के तुम क़ुतबियत की मंज़िल पर सरफराज़ होने वाले हो और ऐसा वक़्त भी आने वाला है के दौराने वअज़ बरसरे मिम्बर कहोगे के मेरा क़दम तमाम ओलिया की गर्दन पर है और तमाम ओलिया रूए ज़मीन के अर्ज़ करेंगे के अए ग़ौसे आज़म आपका क़दम तो हमारे सरों और हमारी आंखों पर है

फिर हज़रत ताजुल आरेफीन अबुल वफा मुहम्मद काकैस रदीयल्लाहु ताआला अन्हु ने अपनी दाढ़ी पकड़कर इरशाद फरमाया बेटा अब्दुल क़ादिर जब तुम्हारा ये वक़्त आए तो मेरी इस सफेद दाढ़ी को याद रखना बेटा अब्दुल क़ादिर हर मुर्ग़ बोलेगा और चुप हो जाएगा मगर तुम्हारा मुर्ग़ क़यामत तक बोलेगा यानी तुम्हारा सिलसिला और तुम्हारा चर्चा क़यामत जारी रहेगा

बहजतुल असरार

इसी तरह एक और बुजुर्ग हज़रत अबू बकर बिन हुवारा बताएही रदीयल्लाहु ताआला अन्हु जिनकी मशहूर करामत ये है के हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ रदीयल्लाहु ताआला अन्हु ने इनको ख्वाब में अपना खिरक़ा पहनाया और जब ये ख्वाब से बेदार हुए तो खिरक़ा मौजूद पाया
जिनका इरशाद है के जो शख्स 40 बुध को मुसस्सल मेरे मज़ार की ज़ियारत करेगा वो जहन्नम से आज़ाद होगा और जो मेरे रोज़े में दाखिल होगा उसको आग नहीं छुएगी

अब भी आपकी ये करामत है के आपके मज़ार के पास गोश्त और मछली ना पक सकती है ना भुन सकती है आपने बर्सों पहले ये ग़ैब की खबर दी थी के ईराक़ में आठ ओलिया विलायत के दर्जे पर फाइज़ होंगे जिनके नाम ये हैं

हज़रत मअरूफ करखी हज़रत अहमद बिन हंबल हज़रत बिशर हाफी हज़रत मन्सूर बिन अम्मार हज़रत जुनैद बग़दादी हज़रत सर्री सक़ती हज़रत सुहैल बिन अब्दुल्लाह तस्तरी और हज़रत शैख अब्दुल क़ादिर जीलानी रदीयल्लाहु ताआला अलैहिम अजमईन

लोगों ने दर्याफ्त किया के अब्दुल क़ादिर जीलानी कोन हैं फरमाया ये एक अजमी सय्यद हैं गीलान में पैदा होंगे बग़दाद इनका मसकन होगा पांचवी सदी में इनका ज़हूर होगा और वो विलायत के मक़ामे फरदियत की ऐसी मंज़िल पर फाइज़ होंगे के एक दिन वो बरसरे मिम्बर ये ऐलान फरमाएंगे के

क़ द मी हाज़िही अला र क़ बति कुल्लि वली यिल्लाह

मेरा ये क़दम हर वली की गर्दन पर है

क़लाए दुल जवाहर

अल्लाहु अकबर

ज़रा सोचो ये रहवरे आलम सल्लल्लाहु ताआला अलैह वसल्लम की उम्मत के वलियों के इल्म का आलम है तो फिर सरकारे मदीना सल्लल्लाहु ताआला अलैह वसल्लम के इल्म का आलम क्या होगा

शैख जीलानी सरकार ग़ौसे आज़म खुद इरशाद फरमाते हैं के

दिन हफ्ता महीना साल शुरू होने से पहले मेरे पास हाज़िर होकर मुझे सलाम करते हैं और जो कुछ इसमें होने वाला होता है उसकी मुझे खबर देते हैं
नेक बद मेरे सामने पेश किए जाते हैं मेरी नज़रें लोह महफूज़ पर देखती रहती हैं में आक़ा ए करीम रऊफुर्रहीम सल्लल्लाहु ताआला अलैह वसल्लम का जमीन पर नायब हूं और वारिस

सुब्हानल्लाह

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