Ramzan me kya karein रमज़ान में क्‍या करें ?

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जन्‍नत सजाई जाती है

रमज़ानुल मुबारक के इस्तिक़्बाल के लिये सारा साल जन्नत को सजाया जाता है। चुनान्चे ह़ज़रते सय्यिदुना अ़ब्दुल्लाह इब्ने उ़मर रजि से रिवायत है कि हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं, “बेशक जन्नत इब्तिदाई साल से आइन्दा साल तक रमज़ानुल मुबारक के लिये सजाई जाती है और फ़रमाया रमज़ान शरीफ़ के पहले दिन जन्नत के दरख़्तों के नीचे से बड़ी बड़ी आंखों वाली हू़रों पर हवा चलती है और वो अ़र्ज़ करती हैं, “ऐ परवर्द गार! अपने बन्दों में से ऐसे बन्दों को हमारा शौहर बना जिन को देख कर हमारी आंखें ठन्डी हों और जब वो हमें देखें तो उन की आंखें भी ठन्डी हों।” (शुअ़बुल ईमान, जिल्द:3, स़-फ़ह़ा:312, ह़दीस़:3633)

हर शब साठ हज़ार की बखि़्शश :

ह़ज़रते सय्यिदुना अ़ब्दुल्लाह इब्ने मस्ऊ़द से रिवायत है कि शहन्शाहे ज़ीशान, मक्की म-दनी सुल्त़ान, रह़्मते आ-लमियान, मह़बूबे रह़मान का फ़रमाने रह़मत निशान है, “रमज़ान शरीफ़ की हर शब आस्मानों में सुब्ह़े स़ादिक़ तक एक मुनादी यह निदा करता है, “ऐ अच्छाई मांगने वाले! मुकम्मल कर (यानी अल्लाह तआला की इत़ाअ़त की त़रफ़ आगे बढ़) और ख़ुश हो जा। और ऐ शरीर! शर से बाज़ आ जा और इ़ब्रत ह़ासि़ल कर। है कोई मगि़्फ़रत का त़ालिब! कि उस की त़लब पूरी की जाए। है कोई तौबा करने वाला! कि उस की तौबा क़बूल की जाए। है कोई दुआ मांगने वाला! कि उस की दुआ क़बूल की जाए। है कोई साइल! कि उस का सुवाल पूरा किया जाए। अल्लाह तआला रमज़ानुल मुबारक की हर शब में इफ़्त़ार के वक़्त साठ हज़ार गुनाहगारों को दोज़ख़ से आज़ाद फ़रमा देता है। और ई़द के दिन सारे महीने के बराबर गुनाहगारों की बखि़्शश की जाती है।” (अद्दुर्रुल मन्सू़र, जिल्द:1, स़-फ़ह़ा:146)

 

 

रोज़ाना दस लाख गुनहगारों की दोज़ख़ से रिहाई :

अल्लाह तआला की इ़नायतों, रहमतों और बखि़्शशों का तजि़्करा करते हुए एक मौक़े पर हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं: “जब रमज़ान की पहली रात होती है तो अल्लाह तआला अपनी मख़्लूक़ की त़रफ़ नज़र फ़रमाता है और जब अल्लाह किसी बन्दे की त़रफ़ नज़र फ़रमाए तो उसे कभी अ़ज़ाब न देगा। और हर रोज़ दस लाख (गुनहगारों) को जहन्नम से आज़ाद फ़रमाता है और जब उन्तीसवीं रात होती है तो महीने भर में जितने आज़ाद किये उन के मज्मूए़ के बराबर उस एक रात में आज़ाद फ़रमाता है। फिर जब ई़दुल फि़त्र की रात आती है। मलाइका खु़शी करते हैं और अल्लाह अपने नूर की ख़ास़ तजल्ली फ़रमाता है और फरिश्तों से फ़रमाता है, “ऐ गुरोहे मलाइका! उस मज़्दूर का क्या बदला है जिस ने काम पूरा कर लिया ?” फ़रिश्ते अ़र्ज़ करते हैं, “उस को पूरा पूरा अज्र दिया जाए।” अल्लाह तआला फ़रमाता है, “मैं तुम्हें गवाह करता हूं कि मैं ने उन सब को बख़्श दिया।” (कन्जु़ल उ़म्माल, जिल्द:8, स़-फ़ह़ा:219, ह़दीस़:23702)

 

भलाई ही भलाई :

अमीरुल मुअ्मिनीन ह़ज़रते सय्यिदुना उ़मर फ़ारूक़े आ’ज़म रजि फ़रमाया करते: “उस महीने को ख़ुश आमदीद है जो हमें पाक करने वाला है। पूरा रमज़ान ख़ैर ही खै़र है दिन का रोज़ा हो या रात का कि़याम। इस महीने में ख़र्च करना जिहाद में ख़र्च करने का दरजा रखता है।” (तम्बीहुल ग़ाफि़लीन, स़-फ़ह़ा:176)

 

ख़र्च में कुशादगी करो :

ह़ज़रते सय्यिदुना ज़मुरह रजि से मरवी है कि हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं: “माहे रमज़ान में घर वालों के ख़र्च में कुशादगी करो क्यूंकि माहे रमज़ान में ख़र्च करना अल्लाह तआला की राह में ख़र्च करने की त़रह़ है।” (अल जामिउ़स़्स़ग़ीर, स़-फ़ह़ा:162, ह़दीस़:2716)

 

बड़ी बड़ी आंख वाली ह़ूरें :

ह़ज़रते सय्यिदुना अ़ब्दुल्लाह इब्ने अ़ब्बास रजि से मरवी है कि हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं: “जब रमज़ान शरीफ़ की पहली तारीख़ आती है तो अ़र्शे अ़ज़ीम के नीचे से मस़ीरा नामी हवा चलती है जो जन्नत के दरख़्तों के पत्‍तों को हिलाती है। इस हवा के चलने से ऐसी दिलकश आवाज़ बुलन्द होती है कि इस से बेहतर आवाज़ आज तक किसी ने नहीं सुनी। इस आवाज़ को सुन कर बड़ी बड़ी आंखों वाली हू़रें ज़ाहिर होती हैं यहां तक कि जन्नत के बुलन्द मह़ल्लों पर खड़ी हो जाती हैं और कहती हैं: “है कोई जो हम को अल्लाह तआला से मांग ले कि हमारा निकाह़ उस से हो ?” फिर वो ह़ूरें दारोग़ए जन्नत (ह़ज़रते) रिज़वान से पूछती हैं: “आज यह कैसी रात है ?” (ह़ज़रते) रिज़वान जवाबन तल्बियह (यानी लब्बैक) कहते हैं, फिर कहते हैं: “यह माहे रमज़ान की पहली रात है, जन्नत के दरवाजे़ उम्मते मुह़म्मदिय्या के रोज़ेदारों के लिये खोल दिये गए हैं।” (अत्‍तरग़ीब वत्‍तरहीब, जिल्द:2, स़-फ़ह़ा:60, ह़दीस़:23)

 

दो2 अंधेरे दूर :

मन्क़ूल है कि अल्लाह तआला ने ह़ज़रते सय्यिदुना मूसा कलीमुल्लाह से फ़रमाया कि मैं ने उम्मते मुह़म्मदिय्या को दो2 नूर अ़त़ा किये हैं ताकि वो दो2 अंधेरों के ज़रर (यानी नुक़्स़ान) से मह़फ़ूज़ रहें। सय्यिदुना मूसा कलीमुल्लाह ने अ़र्ज़ की या अल्लाह! वो दो2 नूर कौन कौन से हैं ? इर्शाद हुआ, “नूरे रमज़ान और नूरे कु़रआन”। सय्यिदुना मूसा कलीमुल्लाह ने अ़र्ज़ की: दो2 अंधेरे कौन कौन से हैं ? फ़रमाया, “एक क़ब्र का और दूसरा कि़यामत का।” (दुर्रतुन्नासि़ह़ीन, स़-फ़ह़ा:9)

खु़दा माहे रमज़ान के क़द्रदान पर किस दरजा मेहरबान है। पेशकर्दा दोनों रिवायतों में माहे रमज़ान की किस क़दर अ़ज़ीम रहमतों और बरकतों का जि़क्र किया गया है। माहे रमज़ान का क़द्रदान रोज़े रख कर खु़दाए रह़मान की रिज़ा ह़ासि़ल कर के जन्नतों की अबदी और सरमदी ने’मतें ह़ासि़ल करता है। नीज़ दूसरी हि़कायत में दो2 नूर और दो2 अंधेंरों का जि़क्र किया गया है। अंधेरों को दूर करने के लिये रौशनी का वुजूद ना गुज़ीर है। खु़दाए रह़मान के इस अ़ज़ीम एह़सान पर कु़रबान! कि इस ने हमें क़ुरआन व रमज़ान के दो2 नूर अ़त़ा कर दिये ताकि क़ब्रो कि़यामत के हौलनाक अंधेरे दूर हों और नूर ही नूर हो जाए।

 

रोज़ा व क़ुरआन शफ़ाअ़त करेंगे :

रोज़ा और क़ुरआन रोज़े मह़शर मुसल्मान के लिये शफ़ाअ़त का सामान भी फ़राहम करेंगे। चुनान्चे हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं, “रोज़ा और कु़रआन बन्दे के लिये कि़यामत के दिन शफ़ाअ़त करेंगे। रोज़ा अ़र्ज़ करेगा, ऐ रब्बे करीम! मैं ने खाने और ख़्वाहिशों से दिन में इसे रोक दिया, मेरी शफ़ाअ़त इस के ह़क़ में क़बूल फ़रमा। क़ुरआन कहेगा, मैं ने इसे रात में सोने से बाज़ रखा, मेरी शफ़ाअ़त इस के लिये क़बूल कर। पस दोनों2 की शफ़ाअ़तें क़बूल होंगी।” (मुस्नदे इमाम अह़मद, जिल्द:2, स़-फ़ह़ा:586, ह़दीस़:6637)

 

बखि़्शश का बहाना :

अमीरुल मुअ्मिनीन ह़ज़रते मौलाए काइनात, अ़लिय्युल मुर्तज़ा शेरे खु़दा फ़रमाते हैं, “अगर अल्लाह को उम्मते मुह़म्मदी पर अ़ज़ाब करना मक़्स़ूद होता तो उन को रमज़ान और सूरए शरीफ़ हरगिज़ इ़नायत न फ़रमाता।” (नुज़्हतुल मजालिस, जिल्द:1, स़-फ़ह़ा:216)

 

लाख रमज़ान का स़वाब :

ह़ज़रते सय्यिदुना अ़ब्दुल्लाह इब्ने अ़ब्बास रजि से रिवायत है कि हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं “जिस ने मक्कए मुकर्रमा में माहे रमज़ान पाया और रोज़ा रखा और रात में जितना मुयस्सर आया कि़याम किया तो अल्लाह उस के लिये और जगह के एक लाख रमज़ान का स़वाब लिखेगा और हर दिन एक गु़लाम आज़ाद करने का स़वाब और हर रात एक ग़ुलाम आज़ाद करने का स़वाब और हर रोज़ जिहाद में घौड़े पर सुवार कर देने का स़वाब और हर दिन में नेकी और हर रात में नेकी लिखेगा।” (इब्ने माजह, जिल्द:3, स़-फ़ह़ा:523, ह़दीस़:3117)

 

इन बातों का रखें ख्‍याल:

  • रमजान का चांद देखते ही पूरे महीने के रोजे की नियत कर लें.
  • सारी फ़र्ज़ नमाज़ें अपने वक्‍़त पर बाजमात अदा करें
  • सलातुत तस्‍बीह पढें 
  • कुरान का तर्जुमा पढ़ें 
  • सेहरी में ज्‍यादा तला, मसालेदार, मीठा खाना न खाएं, इससे प्‍यास ज्‍यादा लगेगी.
  • इफ्तार हल्‍के खाने से शुरु करें. खजूर से इफ्तार करना बेहतर है. इफ्तार में पानी, सलाद, फल, जूस और सूप ज्‍यादा खाएं और पीएं.
  • इफ्तार के बाद ज्‍यादा से ज्‍यादा पानी पीयें. दिनभर के रोजे के बाद शरीर में पानी की काफी कमी हो जाती है. मर्दों को कम से 5 लीटर और औरतों को कम से कम 2 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए.
  • ज्‍यादा से ज्‍यादा इबादत करें क्‍यूंकि इस महीने में कर नेक काम का सवाब बढ़ा दिया जाता है.
  • रमजान में ज्‍यादा से ज्‍यादा कुरान की तिलावत, नमाज की पाबंदी, जकात, सदका खैरात और अल्‍लाह का जिक्र करें.
  • नमाज के बाद कुरान पाक की तिलावत की आदत डालें. आनलाईन कुरान भी सुन सकते हैं
  • कोशिश करें कि हर वक्‍त बा-वजू रहें. रात को जल्‍दी सोने की आदत डालें ताकि आप फज्र की नमाज के लिए उठ सकें.
  • हर रात सोने से पहले अपने किए हुए आमाल के बारे में जरूर सोचें. अपने नेक आमाल पर अल्‍लाह का शुक्र अदा कीजिए और अपनी गलतियों और कोताहियों के लिए अल्‍लाह से माफी मांगिये और तौबा कीजिए.
  • रमजान में अपने पड़ोसियों को हमेशा याद रखें और उनका ख्‍याल रखें.
  • नफ्ल नमाजों को भी जरूरी समझें.
  • ज्‍यादा से ज्‍यादा वक्‍त कुरान और हदीथ, फिकह और इस्‍लामी किताबों के मुताले में गुजारें.
  • तमाम बुरी आदतों को छोड़ दें और इस बा-बरकत महीने का इस्‍तेमाल नेक कामों में करें.

 

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