ख़ुश्क दरख़्त पर ताज़ा खजूरें

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*ख़ुश्क दरख़्त पर ताज़ा खजूरें*
_आरिफ़ बिल्लाह,हज़रते सय्यिदुना नूरुद्दीन अब्दुर्रहमान जामी قدس سرہ السامی फ़रमाते हैं :-_ *_इमामे आली मकाम हज़रते सय्यिदुना इमामे हसन मुज्तबा رضی الله تعالی عنہ सफ़र के दौरान खजूरों के बाग से गुज़रे जिस के तमाम दरख्त खुश्क हो चुके थे,हज़रते सय्यिदुना अब्दुल्लाह इब्ने जुबैर رضی الله تعا لی عنھما भी इस सफ़र में साथ थे ।_*
_हज़रते इमामे हसन رضی الله تعا لی عنہ ने उस बाग में पड़ाव डाला (या’नी क़ियाम किया) ।_
*_खुद्दाम ने एक सूखे दरख्त के नीचे आराम के लिये बिछोना बिछा दिया । हज़रते सय्यिदुना अब्दुल्लाह इब्ने जुबैर رضی الله تعا لی عنھما ने अर्ज की :-_* _ऐ नवासए रसूल! काश !_
_इस सूखे दरख्त पर ताज़ा खजूरे होती ! कि हम सैर हो कर खाते । येह सुन कर हज़रते सय्यिदुना इमामे हसन मुज्तबा رضی الله تعا لی عنہ ने आहिस्ता आवाज़ में कोई दुआ पढ़ी,जिस की ब-र-कत से चन्द लम्हों में वोह सूखा दरख्त सर सब्जो शादाब हो गया और उस में ताज़ा पक्की खजूरें आ गई ।_
*_येह मन्ज़र देख कर एक शुतुरबान (या’नी ऊंट हांकने वाला) कहने लगा :-_* _येह सब जादू का करिश्मा है । हज़रते सय्यिदुना अब्दुल्लाह इब्ने जुबैर رضی الله تعا لی عنھما ने उसे डांटा और फ़रमाया :-_ *_तौबा कर,येह जादू नहीं बल्कि शहज़ादए रसूल की दुआए मक़बूल है ।_*
_फिर लोगों ने दरख्त से खजूरें तोड़ी और काफ़िले वालों ने खूब खाई ।_
*_राकिबे दोशे शहनशाहे उमम या हसन इब्ने अली !_*
*_कर दो करम ! फ़ातिमा के लाल हैदर के पिसर !_*
*_अपनी उल्फ़त दो मुझे दो अपना ग़म_*
*_📓इमामे हसन की 30 हिकायात

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