मौला अली की ताजपोशी का दिन

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मौला अली की ताजपोशी का दिन
यानी
ईद ए गदीर

रसुलल्लाह सल्लल्लाहो अलैही व सल्लम आखरी हज से लौट रहे थे और आपके साथ हज़ारों सहाबा सफर कर रहे थे उस वक़्त ‘गदीर ए खुम’ नाम की जगह पर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैही व सल्लम ने मौला अली का हाथ बुलन्द करके ये फरमाया था

‘मन कुन्तो मौला फहाज़ा अलियुन मौला’ यानी मैं जिसका मौला, उस उस का 👉ये अली मौला

(वो दिन 18 ज़िल्हज्ज का था यानी बकरा ईद से 7 दिन बाद)

हवाला : सहीह तिर्मिज़ी जिल्द 2 सफा 298,
सुनन इब्न माजा,
मसनद अहमद बिन हम्बल 84
तफ्सिर ए कबीर
तिब्रानी
(तक़रिबन 30 अह्लेसुन्नत की किताबों के हवाले और है)

💢यानी खुलासा ये है के जिस जिस के रसुलल्लाह इमाम है, सरदार है, पेशवा है, मुश्किल कुशा है, आक़ा है उन सब के इमाम,सरदार, पेशवा, आक़ा मुश्किल कुशा अली मौला है।

रसुलल्लाह सल्लल्लाहो अलैही व सल्लम तमाम रसूल व नबियों के मौला है, तमाम सहाबा के मौला है, तमाम वलियों के मौला है, तमाम इन्सान व जिन्नो के मौला है। और किसी को इससे इन्कार नही है इस लिहाज़ से ये तमाम तर औसाफ व कमालात मौला अली अलैहिस्सलाम को भी हासिल हुए के मुहम्मद रसूलल्लाह सल्लल्लाहो अलैही व सल्लम ने खुद फरमाया है के मैं मुहम्मद जिसका मौला हूं उसका अली भी मौला है। (अलैहिस्सलाम)
💢बस ये के मौला अली रसुलल्लाह के जाँनशीन व वसी है रसुलल्लाह के तमाम तर रूहानी फैज़ का सिलसिला आप मौला अली से ही आगे बड़ा। तमाम औलिया व क़लन्दरों व गौस व क़ुतुब व अब्दाल ने आप ही से फैज़ हासिल किया। आप मौला अली ही की ज़ात ए पाक है के जो किसी भी इन्सान या जिन्न को विलायत का रुतबा अता कर सकती है और बड़े से बड़े रूहानी मक़ाम पर फाएज़ कर सकती है।
मगर आप नबी नही।

मौला अली अलैहिस्सलाम और अहलेबैत पन्जतन पाक के चाहने वाले इस दिन 18 ज़िल्हज्ज को जशन मनाते आ रहे है और इसे ईद ए गदीर कहते है।💟

💢मुसलमानो ! इस दिन को मनाना चाहिये के पूरी दुनिया मे तमाम तर अहले सुन्नत की खानकाहे और दरबार खुसुसन अजमेर शरीफ, मकनपुर शरीफ (दम मदार) देवा शरीफ (वारिस पाक), ताजबाग शरीफ वगैरा वगैरा यानी सैय्यद ज़ादो के जहां जहां दरबार है वहां वहां ये दिन यानी 18 ज़िल्हज्ज (बकरा ईद के 7 दिन बाद) बड़ी धूम-धाम से ईद ए गदीर के नाम से मनाया जाता है । आप चाहे तो तस्दिक़ कर सकते है।

इसी पर हज़रत अमीर खुसरो रहमतुल्लाह अलैह का कलाम है जिसे उस्ताद नुसरत फतेह अली खान सहाब ने क़्व्वाली पड़ी है।(मन कुन्तो मौला….)(availabale on YOUTUBE)

https://youtu.be/KtvnJhdQLJY

💢कुछ लोगो का कहना है के ये दिन यानी ईद ए गदीर शिया हज़रात भी मनाते है इसलिये हमे नही मनानी चाहिये मगर शिया तो रमजान ईद भी मनाते है तो क्या हम न मनाये? और मौला अली अलैहिस्सलाम तो हम सबके है जो उन्हे मानेगा,उनसे मुहब्बत करेगा उनके दिन मनायेगा और हमारे पुराने बुजुर्गों की बारगाह मे हमेशा ईद ए गदीर मनाया जाता रहा है बस ये के बात हम तक न पहोंच सकी। सरकार गरीब नवाज रहमतुल्लाह अलैह ने खुद इस दिन जशन मनाया है (तारिख ए सुल्तान ए हिन्द) और आज भी अजमेर शरीफ मे मनाया जाता है और क्यू न मनाया जाये के अली के लाडले बेटे है सरकार गरीब नवाज।

पांच नारे पन्जेतन
सवा लख नारा हैदरी

या अली मदद

ईद ए गदीर 18 ज़िल्हज्ज
यानी

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