सलाउद्दीन अय्यूबी जितने बढ़े योद्धा थे, उतने ही न्यायप्रिय और रहम दिल थे!

सलाउद्दीन अय्यूबी जितने बढ़े योद्धा थे, उतने ही न्यायप्रिय और रहम दिल थे!

सलाउद्दीन अय्यूबी
/Salahddin Ayyub
मिस्त्र तथा सीरिया के
सूल्तान
शासनकाल
1174 – 4 मार्च 1193
पूरा नाम
अल नासिर सलाउद्दीन यूसूफ इब्ने अय्यूब
पिता
नजमउद्दीन अय्यूब
जन्म
1137 ईस्वी
तिकरीत उच्च मेसोपोटामिया, अब्बासी ख़िलाफ़त
मृत्यु
4 मार्च 1193 ईस्वी
दमिश्क, सीरिया
धर्म
इस्लाम

सलाउद्दीन अय्यूबी र० अ०: अंग्रेजी An-Nasir Salah ad-Din Yusuf ibn Ayyub सलाउद्दीन युसुफ इब्न अय्युब का जन्म 1138, निधन 4 मार्च में हुआ। वह 1193 बारहवीं शताब्दी के एक मुस्लिम योद्धा थे। जो समकालीन उतरी इराक का रहने वाले थे। उस समय के देश (शाम) सीरिया और मिस्त्र के शासक थे। सीरिया और मिस्त्र के सुल्तान नुरुद्दीन जंगी की मृत्यु के बाद उनके दो भाई शासन करने लगे ,लेकिन जब एक के बाद दोनों भाइयो की मृत्यु हो गई तो अब नुरुद्दीन जंगी के सबसे बफादार और करीबी सलाउद्दीन को शासक बनाया गया। सलाउद्दीन ने 1187 में जब येरुशलम पर विजय प्राप्त करी तो पोप के आह्वाहन पर इंग्लैंड का बादशाह रिचर्ड दा लाइन हार्ट (Richard the Lionheart) फ्रांस का बादशाह और जर्मनी का बादशाह फेडरिक (Frederick Barbarossa) की सेना ने हमला किया लेकिन सलुद्दीन ने अलग अलग युध्दो में फेडरिक की सेनाओ को पराजित किया। सलाहुद्दीन जितने बढ़े योद्धा थे, उतने ही बड़े और कुशल शासक थे। इसके साथ ही न्यायप्रिय और रहम दिल भी थे। यही कारण है कि यूरोप के इतिहासकार भी उनके सम्मान और महानता में प्रसंशा करते हैं। एक बार जब इंग्लैंड के शासक रिचर्ड ने मुसलमानों से अकरा का किला जीत लिया और मुस्लिम सेना ने किले को घेर लिया और युद्ध आरंभ हो गया ,उसी समय रिचर्ड बीमार पड़ गया और कोई अच्छा हकीम (वेध)नहीं मिल रहा था ,तब सलाउद्दीन ने अपना हकीम को दवाइयों के साथ रिचर्ड के पास भेजा और उसका इलाज करवाया। इस्लामी इतिहासकार तो यह तक कह देते हैं कि इस्लामी रशीदुन खलीफाओँ के बाद इतना कुशल शासक चरित्रवान और योद्धा कोई नहीं हूआ। बारहवीं सदी के अंत में उनके अभियानों के बाद ईसाई-मुस्लिम द्वंद्व में एक निर्णायक मोड़ आया और जेरुशलम के आसपास कब्जा करने आए यूरोपी ईसाईयों का सफाया हो गया। क्रूसेड युध्दो में ईसाईयों को हराने के बावजूद उसकी यूरोप में छवि एक कुशल योद्धा तथा विनम्र सैनिक की तरह है। सन् 1898 में जर्मनी के राजा विलहेल्म द्वितीय ने सलाउद्दीन की कब्र को सजाने के लिए पैसे भी दिए थे। उनकी मृत्यु के समय उनके पास कुछ दिरहम मात्र ही थे ,क्योंकि वह अपनी आय को लोगो की भलाई के लिए खर्च कर देते थे। उनकी मृत्यु के समय क्रिया-कर्म भी उनके मित्रो ने मिलके करबाया। सलाउद्दीन की प्रसिद्धी इस बात से की जा सकती है कि फिलिस्तीन में बच्चे उसके शोर्य का गान करते हूए कहते हैं –

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