फ़ैज़ान माहे रमज़ान

*फैजाने माहे रमज़ान *

जन्नत मे 8 दरवाजे है उनमे एक दरवाजे का नाम रैयान है उसम दरवाजे से वही जन्नत मे जायेंगे जो रोजा रखते हैं

(صحیح البخارى، كتاب بدء الخلق، باب صفةابواب الجنة، ج-1، ص-394)

जिसने अल्लाह की रजा के लिए एक दीन का रोजा रखा तो अल्लाह उसे जहन्नम से इतना दूर कर देगा कि कव्वा जब बच्चा था तब से उसने उडना शुरु किया यहा तक की बुढा हो कर मरा

{المسند، للإمام أحمد بن حنبل، الحدیث-619}

उमुमन रिसर्च के मुताबिक कव्वा 22 साल जिंदा रेहता है ओर कव्वा 30-60 मिल फी घंटा (यानी 1 घंटे मे 45-90 km) उड लेता है

तो गौर करे इस हदीस मे है कि *एक रोजे* की बरकत से इन्सान को जहन्नम से इतना दुर कर दीया जाता है जितना कव्वा बचपन से ले कर मरने तक उड कर जितना फासला तै करे यानी करोडो किलोमीटर

तो *सारे* रोजे का सवाब कितना ज्यादा होगा

मगर याद रहे ये हदीस 1 रोजे की फजीलत बताने के लिए है इसका हरगिज़ ये मतलब नही के रमजान मे कोइ एक रोजा रखे ओर बाकी के न रखे, 
ऐसे शख्स को हरगीज ये सवाब न मिलेगा बल्कि वो तो जहन्नम का हकदार होगा

हदीस मुख्तसर होती है मगर उसका मतलब जामेअ होता है

इस हदीस का बरअक्स देखे तो जो रोजा नही रखता वो उतना हि जहन्नम के करीब होगा

आका करीम ﷺ ने इरशाद फरमाया : अगर बन्दो को मालूम होता कि रमजान क्या है तो मेरी उम्मत तमन्ना करती के कि काश पुरा साल रमजान ही हो

(ابن خزيمه ، جلد 3 ،صفحہ 190)

इस हदीस से अंदाजा लगाया जा सकता है कि रमजान की फजीलत कितनी ज्यादा है कि इसमे शदीद भुख प्यास की शिद्दत होने के बावजूद उम्मत तमन्ना करती के पुरा साल रमजान हो

माशा अल्लाह

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