इसलिए आपने रोज़ा रखा और तमाम लोगों को रोज़ा रखने का हुकुम दिया

इसलिए आपने रोज़ा रखा और तमाम लोगों को रोज़ा रखने का हुकुम दिया

Aaiye nazar daalte hain2⃣ruiyat ke dalaail par.

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2⃣. इमाम सरख़सी रहमउल्लाह. ने अल-मबसूत्त में इब्ने अब्बास र. अ. से मरवी ये हदीस बयान की है :— 
“मुसलमानों ने सुबह रोज़ा: न रखा क्यों कि उन्हें चाँद नज़र न आया. फिर एक बदु पहुंचा और इस बात की शहादत दी कि उसने चाँद देखा है तो रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:—क्या तुम इस बात की गवाही देते हो कि अल्लाह के सिवा कोई मअबूद नहीं और और मैं अल्लाह का रसूल ﷺ हूँ. बदु ने कहा : हाँ ! आपने फ़रमाया अल्लाहु अकबर ! तमाम मुसलमानों के लिए एक शख़्स ( की गवाही ) ही काफ़ी है. इसलिए आपने रोज़ा: रखा और तमाम लोगों को रोज़ा: रखने का हुकुम दिया.”

इस हदीस को अबु दाऊद ने भी इब्ने अब्बास र.अ. से मुख़्तलिफ़ अल्फ़ाज़ से बयान किया है.
( सुनन अबु दाऊद हदीष न. 2333 )

आप ﷺ ने एक अराबी की रुइयत को जिसे आप ﷺ जानते भी नहीं थे क़ुबूल किया जिसने मदीना: के बाहर चाँद देखा था.0

ये हदीष अपने इलाक़े से बाहर चाँद नज़र आने के हुकुम को बयान करती है क्योंकि वोह बदु मदीना: के बाहर से आया था.0

आप ﷺ ने इसकी रुइयत को क़ुबूल करने की महज़ एक शर्त्त लगाई यानि कि आया वोह मुसलमान है या नहीं.0

मंदर्ज़ा ( उपरोक्त ) ऊपर दोनों हदीष को जोड़कर हुकुम ये निकलता है कि अगर कोई भी मुसलमान चाँद के देखे जाने की गवाही देदे तो उसकी गवाही मुअतबर समझी जाएगी और तमाम मुसलमानों पर फ़र्ज़ हो जाएगा के वो इसके मुत्ताबिक़ रमज़ान की शुरुआत और इख़्तताम करें.

रही बात ये कि वो अगर झूठ बोल रहा हो तो गुनाह का वबाल उसके सर होगा और हम अल्लाह के यहाँ हुकुम शरई पर चलने की वजह से सुरख़रू होंगे.0

इस हदीष में रसूलुल्लाह ﷺ का यह कहना कि “तमाम मुसलमानों के लिए एक शख़्स ( की गवाही ) ही काफ़ी है.” क़ाबिले ज़िक्र है और इस से रुगरदानी ( मुंह मोड़ना ) नहीं की जानी चाहिए. रमज़ान के मसअले की वज़ाहत के बाद ईद के दिन के मसअले की वज़ाहत भी ज़रूरी है. जैसा कि रमज़ान के आग़ाज़ का फ़ैसला: चाँद नज़र आने पर होता है, इसी त्तरह ईद का इंहसार ( दारोमदार ) भी चाँद का नज़र पर होता है. इस से मुतअल्लिक़ अबु हुरैरा: र.अ. ने रसूलुल्लाह ﷺ से यह हदीष रिवायत की है. “रसूलुल्लाह ﷺ ने दो दिन रोज़ा: रखने से मना किया है :— ईदुल अज़हा और ईदुल फ़ित्तर के दिन.”
( बुख़ारी व मुस्लिम)

यह हदीष दुरुस्त ईद का दिन मुत्अय्यन करने को इन्तेहाई अहम मसअला: बना देती है. आइए अब ईद से मुतअल्लिक़ अहादीष का मुत्तालेआ करें :—–

जारी—–
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2⃣. امام سرخسیؒ نے المبسوط میں ابن عباسؓ سے مروی یہ حدیث بیان کی ہے: 
’’مسلمانوں نے صبح روزہ نہ رکھا کیونکہ انہیں چاند نظر نہ آیا۔ پھر ایک بدو پہنچا اور اس بات کی شہادت دی کہ اس نے چاند دیکھا ہے۔ تو رسول اللہ ا نے فرمایا: کیا تم اس بات کی گواہی دیتے ہو کہ اللہ کے سوا کوئی معبود نہیں اور میں اللہ کا رسول ہوں۔ بدو نے کہا: ہاں! آپ ا نے فرمایا: اللہ اکبر!تمام مسلمانوں کے لیے ایک شخص (کی گواہی)ہی کافی ہے۔ پس آپ ا نے روزہ رکھا اور تمام لوگوں کو روزہ رکھنے کا حکم دیا ‘‘ ۔ اس حدیث کو ابو داؤدؒ نے بھی ابن عباسؓ سے مختلف الفاظ سے بیان کیا ہے (سنن ابو داؤد حدیث نمبر ۲۳۳۳)۔

O آپ ﷺ نے ایک اعرابی کی رویت کو، جسے آپ ﷺ شاید جانتے بھی نہ تھے، قبول کیا جس نے مدینہ کے باہر چاند دیکھا تھا

O یہ حدیث اپنے علاقے سے باہر چاند نظر آنے کے حکم کو بیان کرتی ہے کیونکہ وہ بدو مدینہ کے باہر سے آیا تھا

O آپ ﷺ نے اس کی رؤیت کو قبول کرنے کی محض ایک شرط لگائی یعنی کہ آیا کہ وہ مسلمان ہے یا نہیں

O مندرجہ بالا دونوں حدیث کو جوڑ کر حکم یہ نکلتا ہے کہ اگر کوئی بھی مسلمان چاند کے دیکھے جانے کی گواہی دے دے تو اس کی گواہی معتبر سمجھی جائیگی اور تمام مسلمانوں پر فرض ہو جائے گا کہ وہ اس کے مطابق رمضان کی شروعات اور اختتام کریں

O رہی بات یہ کہ وہ اگر جھوٹ بول رہا ہو تو گناہ کا وبال اس کے سر ہوگا اور ہم اللہ کے ہاں حکم شرعی پر چلنے کی وجہ سے سرخرو ہوں گے

O اس حدیث میں رسول اللہﷺ کا یہ کہنا کہ ’’تمام مسلمانوں کے لیے ایک شخص (کی گواہی)ہی کافی ہے‘‘ قابل ذکر ہے اور اس سے رو گردانی نہیں کی جانی چاہئے رمضان کے مسئلے کی وضاحت کے بعد عید کے دن کے مسئلے کی وضاحت بھی ضروری ہے : جیسا کہ رمضان کے آغاز کا فیصلہ چاند نظر آنے پر ہوتا ہے اسی طرح عید کاانحصار بھی چاند کے نظر آنے پر ہے۔ اس سے متعلق ابوہریرہؓ نے رسول اللہ ﷺسے یہ حدیث روایت کی ہے : ’’رسول اللہ ﷺنے دو دن روزہ رکھنے سے منع کیا ہے : عیدالاضحیٰ اور عید الفطرکے دن‘ ‘(بخاری و مسلم)۔

یہ حدیث درست عید کا دن متعین کرنے کو انتہائی اہم مسئلہ بنا دیتی ہے۔ آئیے اب عید سے متعلق احادیث کا مطالعہ کریں:

جاری……

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