तो बे-हैसियत हो कर रह गए

……तो बे-हैसियत हो कर रह गए

जब पुर्तगाल ने अफ्रीका पर क़ब्ज़ा किया और उसे अपनी कॉलोनी बनाया तो वहां से हज़ारों मुसलमानों को ग़ुलाम बनाकर ब्राज़ील भेज दिया जहां उनसे बेगार लिया जाता था क्योंकि ब्राज़ील भी उस समय पुर्तगाल की कॉलोनी ही था…
ग़ुलाम बनाये गए मुसलमानों में ज़्यादातर नौजवान थे, ब्राज़ील मे आज जो थोड़े बहुत मुसलमान नज़र आते हैं उनमें अधिकांश इन्हीं गुलामों की नस्ल से हैं..

उन मुसलमानों ने अपने दीन की ह़िफाज़त किस तरह की यह एक दिलचस्प वाक़्या है…
कहते हैं कि मुसलमानों को पकड़ पकड़ कर जब कश्ती के ज़रिये छोटे छोटे ग्रूप की शक्ल में ब्राज़ील भेजा जाने लगा तो उस वक़्त के उल्मा-ए-दीन ने एक ख़ुफिया प्लान बनाया, और मंसूबे के मुताबिक़ हर ग्रूप के साथ एक दीनी त़ालिब इल्म को घुसेड़ देते थे ताकि वह लोगों को दीन सिखाता रहे और आम लोग अपने दीन को भूल ना जाएं….

यानि इस तरह सैकड़ों दीनी त़ल्बा ने जानबूझकर ख़ुद को ग़ुलामी की आग मे झोंक दिया ताकि अपने भाइयों की अक़ीदे की हिफाज़त कर सकें और उनके दिलों में दीन ज़िंदा रहे,

कहने का मतलब है कि दीन हमेशा क़ुर्बानी मांगता है और ईमान की मज़बूती के बग़ैर क़ुर्बानी देना मुमकिन ही नहीं..ये फटीचर टाइप रूखी सूखी खाकर टाट पर चूतड़ घिसने वाले त़लबा और तुम्हारी नज़रों मे ख़ाएन मुनाफिक़ मोलवी मे से ही अल्लाह फिर एक जमात ज़रूर पैदा करेगा जो तुम्हारी नस्लों के ईमान बचाने के लिए ख़ुद को मौत की ग़ुलामी मे देकर गुमनाम अमर हो जायेंगे इन थ्रीपीस टाई नॉट वालों की गालियां और तंज़ सुनने के लिए..!!

 

कुर्द’ क़ौम वैश्विक शक्तियों के लिए जंग का ईंधन
अतीत (माज़ी) में बड़े बड़े कारनामे अंजाम देने वाली कुर्द क़ौम आज तबाही व बर्बादी के दहाने पर है। मेरी समझ से इस क़ौम की बर्बादी की दो बड़ी वजहें हैं। पहली वजह इस्लामी क़ौमियत व इस्लामी शिनाख्त (पहचान) से इस क़ौम का मुंह मोड़ना है। कल सलाहुद्दीन अय्यूबी (र.) के दौर में जब इन्हीं कुर्दों ने इस्लामी क़ौमियत को अपना एजेंडा बनाया था तो ये सरबुलंद थे मगर आज जब इन्हों ने इस्लामी क़ौमियत को नज़र अंदाज़ करके नस्ल परस्ताना क़ौमियत को अपना एजेंडा बना लिया तो बे-हैसियत हो कर रह गए।

दूसरी वजह कूर्द क़ौम का अतीत में जीना और वर्तमान को स्वीकार न करना है। अपने इतिहास अर्थात अतीत के “कुर्दिस्तान” को दोबारा साकार करने के ख्वाब में जीने वाली कुर्द क़ौम वर्तमान को कभी स्वीकार न कर सकी जिसके कारण इसने अपने आस पड़ोस के उन तमाम देशों से पंगा लिया जिन में इनके माज़ी का “कुर्दिस्तान” बंटा हुआ है। यानी इन्हों ने उन तमाम देशों को अपना दुश्मन बना लिया जिनमें आज ये बसे हुए हैं। नतीजे के तौर पर जब हर तरफ से इनको मार पड़नी शुरू हुई तो ये अपनी जान बचाने के लिए भाग कर वेस्टर्न मुल्कों की गोद में बैठ गए और उनकी कठपुतली बन गए. आस पड़ोस की तमाम ताक़तों से बग़ावत करने की जो रणनीति इन्हों ने अपनाई थी, उसमें किसी बाहरी ताक़त का कथकंडा बनना इनकी मजबूरी थी और आज इन कुर्दों की स्तिथि ये है कि अमेरिका जिस देश के खिलाफ चाहता है इन्हें इस्तेमाल करता है। अंततः आज कुर्द क़ौम वैश्विक शक्तियों के लिए केवल जंग का ईंधन है जिसका अंजाम मात्र तबाही व बर्बादी है।


क़ुरान की एक आयत है जिस का मतलब है के ”अगर तुम अल्लाह के बताये रास्ते से भटक जाओ गे तो हम तुम्हारे उपर एक जालिम क़ौम मुसललत कर दे गे.” 13वी सदी मे जिस तरह का नरसंहार हुआ, इतिहास ने इस तरह का नरसंहार कभी नही देखा .तेरहवीं सदी में तबाही का एक ज्वार की लहर मुस्लिम दुनिया भर में बह. शहर के बाद शहर, क्षेत्र के बाद क्षेत्र, मुल्क का मुल्क खत्म हो गया. मरने वालों की संख्या अविश्वसनीय था.जिस तरह का प्रकोप मुसलमानो पे तातारी या मोंगोलो की तरफ से आया था और ऐसा लगने लगा के दुनिया से मुसलमानो का सफाया हो जाये गा. मगर इतना होने के बावजूद इस्लाम फिर एक बार मजबूती से खड़ा हुआ और पूरे विश्व मे छा गया.

मुसलमानो पे ये अल्लाह की तरफ से तातरियो की शकल मे ये प्रकोप 1218 मे आया,क्यो के उस समय मुस्लिम शासक या खलीफ़ा भरष्ट्राचार, आपसी दुश्मनी, ऐयाशी मे लिप्त थे. उस समय तक चँगाज़ ख़ान एक शक्ति के तौर पर उभर चुका था, वो मुस्लिम शासको से दोस्ती रखना चाहता था, इसलिये उस ने खवरिज़्म शह से दोस्ती की तरफ हाथ बडाने के उद्देश से उस ने एक राजनयिक दल भेजा, मगर इसे खवरिज़्म शह की मूर्खता काहे गे के उस ने सभी 400 जो के चँगाज़ खन के भेजे हुए थे उस ने सब को जासूसी के इल्जाम मे हत्या करा दी, इधर बग़दाद मे बैठा अब्बासी खलीफ़ा भी यही चाहता था के खवरिज़्म शह की हुकूमत का खात्मा हो जाये. चँगाज़ ख़ान ने जब सुना के उस के राजनयिक दल की हत्या कर दी गयी है तो उस ने कहा के मे अब एक भी मुस्लिम मुल्क और मुसलमानो को नही छोड़ु गा और उस ने इस तरह हमला के लिये निकल पड़ा. उस के बाद पूरी दुनिया ने देखा के किस तरह मुसलमानो का क़त्ले आम हुआ.चँगाज़ ख़ान द्वारा मुसलमानो के नरसंहार की सूची नीचे दी जा रही है,

Nishapur 1,747,000 dead
Herat 1,600,000 dead
Samarkand 950,000 dead
Merv 700,000 dead
Aleppo 50,000 dead
Balkh completely destroyed
Khiva completely destroyed
Harran completely destroyed

चँगाज़ ख़ान उस समय इस्लाम का प्रमुख शहर बग़दाद पे हमला नही कर सका, उस के बाद उस के पोते हलाकू ख़ान ने बग़दाद पर हमला किया.बग़दाद उस समय दुनिया का सब से उन्नत शहर था जो के शिक्षा, बायपार, साइन्स टेक्नालजी मे सब से आगे था. हलाकू ख़ान ने हमला किया और पूरे शहर की इंट से इंट बजा दी. पूरे बग़दाद को जला दिया गया, उस ने बग़दाद मे 15 लाख इंसानो का क़तल किया और दुनिया की सब से बड़ी पुस्तकल्य को आग लगा दी. . शहर मे सिर्फ खलीफ़ा मुह्तसिम बिल्ला बचा था उसे भी एक प्लास्टिक बग मे बाँध कर लात-घूँसो से मार कर खत्म किया क्यो के हलाकू ख़ान को किसी ने कहा था के इस्लामी खलीफ़ा का खून जमीन पे गिरने से प्रकोप आता है. बग़दाद को लूटने के बाद वो सीरिया और आफ्रिका मुल्को की तरफ बड़ा और वहा भी क़त्ले आम और लुट-पाट की उस समय ऐसा लग रहा था के इस आंधी को कोई रोक नही पाये गा, और इस धरती से मुसलमानो का खात्मा हो जाये गा मगर 1260 मे Ain-Jalut, in Galilee मे सुल्तान Baibers के हाथो हलाकू ख़ान के शर्मनाक हार हुई . इस फ़ौज को तैयार करने मे शैख़ Izzuddin का बहुत बड़ा हाथ था जो के एक इस्लामिक विद्दवान थे, उन्हो ने मुसलमानो की एक फ़ौज बनाई और मॉंगल के खिलफ् जिहाद करने के लिये तैयार किया, जिस मे उन को कामयाबी मिली.

13 वी सदी मे जिस तरह का प्रकोप मुसलमानो पे चंगेज़ और हलाकू की शक्ल मे आया थे ऐसा इस्लाम के 1400 साल के इतिहास मे कभी नही आया था और आप अल्लाह का करिश्मा देखिये के जिस मोंगोल से आक्रमण से लग रहा था के इस्लाम का सफाया हो जायेगा, उसी हलाकू खन के पोते ने इस्लाम क़ाबुल कर इस्लाम को आगे फैलाया.

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