मुआविया की झूठी सहबीयत का तेहक़ीकी जायज़ा

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Hazrat Ali Bin Ja’d Ustade Imam Bukhari Jinhen Siyar A’lam, 02/468_459 Me Imam Wa Hafiz Al-Hadit Jaise Waqi’ Al-Alfaz Se Yad Kiya Gaya Hai, Aap Farmate Hain:

مَاتَ وَاللہِ مُعَاوِیَۃُ عَلیٰ غَیْرِ الْاِسْلَامِ
Allah Kee Qasam Mu’awiyah Islam Se Khaarij Ho Kar Mara.

[Masa’il Ahmad Ibn Hanbal, 02/154.]

Kya Hamare Ulama’e Ahle Sunnat Inhen Raafzi, Gustakh Aur Ma’azAllah Jahannam Ka Kutta Kehne Ka Hausala Rakhte Hain?

मुआविया की झूठी सहबीयत का तेहक़ीकी जायज़ा

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●इस हादीस को मद्दे नज़र रख कर समझे👇🏻

हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसूद ® रिवायत करते है , की मुझसे रासुल्लाह (स.अ.व.अ) ने इर्शाद फ़रमाया की, मुसलमान को गाली देने से आदमी फ़ासिक हो जाता है, और मुसलमान से लड़ना कुफ्र हैं.!

ये दोनों अलामत कथा कथित साहबी मुआविया पर फिट बैठती हैं,
क्यों की खलीफा राशिद अली ए मूर्तज़ा से जंग ए जमल करने वालो का सरदार मुआविया बिन अब सुफियान ही था , इनको बचाने के लिए मौलवी हज़रात “किसास ए हज़रत उस्मान का नाम देती हैं”
बहर हाल ये मान भी लिया जाए की ये खता-ए-इज्तिहादी हुई, जमल में क्यों कि दिगर साहब रिज़्वन उल्लाह आजमीन साथ थे, खास तौर उम्मुल मोमेनीन राज़ीअल्लाह ताला आलेहा
इस बिना पँर अगर मुआविया को शक के आधार पर मुजरिम नही भी मन जाए और सहाबा की अज़मत पँर मान लिया जाए तो ये सवाल उठते ही कि

●क्या सिफ़्फ़ीन की जंग दुबारा से खता-ए-इज्तिहादी नही है,
●जिसमे उनके साथ कोई भी जय्यद साहबी शामिल नही हुआ जमल की तरह तो फिर, ये क्यों तनहा जंग कर राह थे
●क्या हर बार खता ए इजतिहाद की आड़ में मुआविया का दिफ़ा करना इंसाफ हैं.??
●क्या इन दोनों जंगों के बाद मुआविया ने सुलाह की..??
●हज़रत अली ए मुर्तज़ा की मोहब्बत ईमान का हिस्सा है तो जमल और सिफ़्फ़ीन की जंग में इश्क़ था या बुग्ज़ ए अली था.??

अब आते है मुसलमान को गाली देने वाला फ़ासिक है ऊपर दी हुई हदीस के मुताबिक

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इब्ने माज़ा हदीस न.121 में मुआविया ने ज़िक्र ए अली सुन कर ऐसे नामुनासिब कलेमात कहे जिससे सामने वाले साहबी को सुनकर गुस्सा आ गया और उन्हीने फ़ज़ीलत ए अली ए मुर्तज़ा बयान की

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सही मुस्लिम हदीस न.6220 में मुआविया ने अमर बिन साद बिन अबि वक़्क़स से सवाल किया अली ए मुर्तज़ा को गाली क्यों नही देते..??

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सुनन तिर्मिज़ी में हदीस 3724 में भी यही रिवायत दर्ज है कि मुआविया ने तुम क्यों गाली नही देते हज़रत अली ए मुर्तज़ा को

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मुआविया ने हज़रत उमर से ज़्यादा खुद खिलाफत का अहल बताया और भरे मजमे में हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर को रुसवा किया और वो मौत के ख़ौफ से खामोश रहे…!
सही बुखारी हदीस 4108

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मुआविया के गवर्नर बर सारे मिम्बर ए रसूल पे बैठ कर साहबी के रसूल अली ए मूर्तज़ा को गालियाँ देते थे.!
सही बुखरी हदीस #3703
सही मुस्लिम हदीस #6229

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सही मुस्लिम हदीस #4061

साहबी रसूल एबाद बिन समेद राज़ीअल्लाह अन्हा की बताई हुई हदीस पर मुआविया ने इंकार किया और झठी हदीस होने का दावा किया जिस पर हज़रत एबाद रज़ियल्लाहु अन्हा ने कहा :- मुआविया की नाक ख़ाक आलूद हो मैं इसके लश्कर में एक रात भी नही रहना चाहता

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मुआविया बिन अबु सुफियान जान बूझ कर रासुल्लाह की हराम की हुई चीज़ों को बिना परवाह किये इस्तेमाल करता था और शहादत के इमाम हसन पर गुस्ताखाना रवैया दिखाया

सही मुस्लिम हदीस #4776

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सुनन अबु दाऊद हदीस न. #4131

इस हदीस में सहाबा ए रासुल्लाह का साफ़ दावा है कि मुआविया उनको हराम माल खाने का हुक्म और नाहक़ क़त्ल करने कि ताक़ीद करता था.!

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जैसा कि उसने अज़ीम साहबी ए रसूल अम्मार ए यासिर को सिफ़्फ़ीन में क़त्ल करवाया , जिनके लिए नबी ए पाक ने इर्शाद फ़रमाया था कि अम्मार को एक बाघी जमात क़त्ल करेगी जो जहन्नम की तरफ बुलाने वाली होगी

सही बुखारी हदीस न.2812
सही मुस्लिम हदीस न.7320

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आखिरी हादिस जिस्से ये वाज़ेह हो जाएगा कि , जो अक़ीदा इन मौलवी हज़रात ने ऊम्मत को सिखाया है कि सहाबा की जमात बक्शी हुई हैं, उनकी मग़फ़िरत हो चुकी है इस हदीस से उनके इस झूठ से भी पर्दा उठ जाएगा कि,

अल्लाह के नबी की साफ अल्फाज़ो में हदीस वारिद हुई है सही बुखरी, जिल्द न.8 में , बाब ए फ़ज़ाईल ए कौसर में हदीस न.6585 जिस में साफ लिखा हैं सहाबा की जमात में से कुछ जन्नत में जायेगे और कुछ जहन्नम में जाएगे

सही बुख़ारी हदीस #6585

Muawiya ke kaam hi kuch is tarah hai ke sunne walo me 4 group ban jaate hai..

1. Wo jo saari baato ko jhoothla deta hai.
2. Wo jo saari baato ko jaanne ke baad Lanat, Gaali Galoch par utar aate hai.
3. Wo jo saari baato ko jaankar bhi Sukoot akhtiyar karte hai..
4. Wo jo saari baato ko janne k baad sukoot bhi rkhte hai mgr jb koi Jhoothe Fazail Bayan karta hai to sukoot ko todkar Haq baat bayan karta hai .

1) Munafiq grp 2)jaazbaati grp. 3)padhe lekhe duniyawi diplomat tunni grp. 4)Sunni Mawli grp.
Well its my faith 4 and 2 grp Allah maf farma ke deen duniya mein qamyaab karega

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