सुल्तान मुराद सानी

(1)सुलेमान शाह
(बेटे)
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(2)गाज़ी अल तुगरल (Ertgrule)
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(3)सुल्तान उस्मान गाजी
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(4)सुल्तान ओरहान गाज़ी
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(5)सुल्तान मुराद गाज़ी अव्वल
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(6)सुल्तान बा-यज़ीद अव्वल
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(7)सुल्तान मोहम्मद अव्वल
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(8)सुल्तान मुराद सानी

कुस्तुन्तुनिया ये शहर 1 हजार साल से रूमियों की आंखों का तारा ओर मरकज़ था ये दुनिया के मज़बूत तरीन शहरो में से एक था,इसकी दीवारे सदियों से नाकाबिले तस्कीर थी, लेकिन 15 सदी में ये शहर चारो तरफ से सल्तनतें ए उस्मानिया के घेरे में आचुका था

1453 में इसी शहर के लिए तारीख की एक ऐसी जंग लड़ी गई जिस का इंतिजार 100 साल से किया जा रहा था.

📜नोट : सुल्तान बा-यज़ीद अव्वल के बेटे को इतिहास में मोहम्मद या महमद कहा जाता हे कुछ इतिहास कार महमद ओर चन्द मोहम्मद अव्वल लिखते हे,में मोहम्मद अव्वल नाम को सही समझता हूं इस लिए सुल्तान मोहम्मद अव्वल ही लिखा हु

👑सुल्तान मुराद सानी👑

सुल्तान मोहम्मद अव्वल के इन्तिक़ाल के बाद 1421 में मुराद सानी सुल्तान बने.

कुस्तुन्तुनिया की दीवारों पे सबसे पहले बोम बरसाने वाले पहले सुल्तान मुराद सानी 1421 में थे, जो 1421 में सल्तनतें ए उस्मानिया के सुल्तान बने और अगले साल 1422 में उन्होंने कुस्तुन्तुनिया का मुहासरा कर लिया था,

उनके पास अपने दौर का जदीद तरीन हथियार टोपे भी थी उनकी तोपो ने जर्मन माहिरीन की निगरानी में कुस्तुन्तुनिया की दीवारों पर बेतहासा गोले बरसाए

इसका अंदाज़ा ऐसे लगाएं की एक टॉवर पर 70 गोले बसाए,

लेकिन सुल्तान के अपने भाई मुस्तुफा ने जो की उस वक़्त एक जगह के गवर्नर थे । रूमी शहनशाह के इशारे पर बगावत करदी, सुल्तान मुराद सानी को मजबूरन कुस्तुन्तुनिया का मुहासरा खत्म करके अपने भाई से जंग करनी पड़ी,

इस जंग में मुस्तुफा तो मारे गए लेकिन सुल्तान मुराद सानी फिर कभी रूमी मरकज़ कुस्तुन्तुनिया की तरफ अपने कदम नही बड़ा सके, सिर्फ कुस्तुन्तनिया से खिराज लेकर इसे उसके हाल पे छोड़ दिया

ओर शुर्ख सेब को पाने का खुवाब लिए इस दुनिया से चले गए

सुल्तान मुराद सानी के 3 बेटे थे

(1) अहमद बेग
(2) अली बेग
(3) मोहम्मद सानी (मोहम्मद फातेह)

सुल्तान के बड़े बेटे अहमद बेग जो अमिसिया शहर के गवर्नर थे वो 1437 में अचानक इन्तिक़ाल कर गए थे। ईनकी जगह दूसरे बेटे अली बेग को गवर्नर बना के भेजा गया लेकिन 1443 में अजर पाशा नामी एक तुर्क सरदार ने अली बेग को ओर उनके बच्चों को रात के अंधेरे में क़त्ल करदिया

अजर पाशा का किया अंजाम हुवा ओर उसने अली बेग को क्यू क़त्ल किया था ये बात तारीख में वाजेह नही है ,

अब सिर्फ तीसरे बेटे मोहम्मद सानी जिन्हें दुनिया मोहम्मद फातेह के नाम से जानती हे सुल्तान बने

सुल्तान मुराद सानी की एक ओर बीवी थी जो सलेबी थी उनसे एक लड़का था जिसका नाम भी सुल्तान ने अहमद रखा था, वो एक साल के थे और जिस दिन मोहम्मद फातेह तख्तनशीन हुवे उस दिन एक सिपाही ने उनके सौतेले एक साला भाई को पानी की होज़ में डुबो कर मार दीया सुल्तान मोहम्मद फातेह ने उस सिपाही को सजा के तौर पे क़त्ल करवा दिया

अब सुल्तान मोहम्मद फातेह सुल्तान बन चुके थे और अपने वालिद के खुव्वाब को पूरा करना चाहते थे शुर्ख सेब को पाने का , ये शुर्ख सेब किया है किसे कहते थे पहले इसको समझिए

तारीख की अज़ीम जंग⚡⚔️

अब सुल्तान मोहम्मद फातेह सुल्तान बन चुके थे और अपने वालिद के खुव्वाब को पूरा करना चाहते थे शुर्ख सेब को पाने का , ये शुर्ख सेब किया है किसे कहते थे पहले इसको समझिए

सुल्तान मोहम्मद फ़तेह जानते थे कि अगर कुस्तुन्तुनिया फ़तेह करना हे तो अपनी रियासत में मुकम्मल अमन जरूरी हे

दूसरा उनके नज़दीक शर्त ये थी कि अपनी तोपो को ओर ज़ियादा पॉवर फूल किया जाए इतना कि वो कुस्तुन्तुनिया की एक हजार साल से खड़ी दीवारों को गिरा सके

यही सब करके सुल्तान को वो शुर्ख सेब मिल सकता था , जिसे पाने की आरज़ू में उनके वालिद इस दुनिया से जा चुके थे ,

ये सुर्ख सेब किया था?

कुस्तुन्तुनिया शहर में एक बोहोत बड़ा चर्च था जिसे हेगासूफ़िया कहते थे इस चर्च के बाहर एक 100 फुट उचे खूबसूरत सुतून पर एक रोमन शहनशाह का घोड़े पे सवार मुज्समा नसब था , ये मुज्समा उसी शहनशाह का था जिसने हेगासूफ़िया चर्च बनवाया था मुज्समे में देवमालाई यूनानी एरो इटलिस जैसा लिबास पेहेन रखा था इसके एक हाथ मे ग्लोब था जिसमे सलीब गड़ी हुई थी ये सलीब ग्लोब पूरी दुनिया पर गलबे की अलामत थी, यूरोप में मशहूर था जो शख्स कुस्तुन्तुनिया फ़तेह करके ये ग्लोब ओर सलीब हासिल करेगा वही पूरी दुनिया का शहनशाह होगा.

चुनांचे इसकी फताह हुक्मरानों के लिए चेलेंज बन चुकी थी,

एक हजार साल में कई लोगो ने ये चेलेंज कुबूल किया लेकिन कुस्तुन्तुनिया की मजबूत दीवारे हर हमलावर को वापस लौटने पर मजबूर कर देती थी उस्मानियो ने भी कई दफा ये कोशिश की लेकिन कामयाब ना हो सके.

तुर्क इस सलीब वाले ग्लोब को सुर्ख सेब कहते थे क्यूंके सुर्ख सेब उनके नजदीक पूरी दुनिया पर हुक्मरानी की अलामत था.

वो सुर्ख सेब को हासिल करने के लिए बेकरार थे हालांकि उस वक़्त वो दुनिया की सुपर पावर तो बहरहाल बन चुके थे लेकिन एक खास वजह उनका मुस्लमान होना ओर इस्लाम मे इसको फ़तेह करने की शूरू से कोशिश हो रही थी.

तो मुराद सानी के वफात के बाद तख्तो ताज के साथ सुर्ख सेब का चेलेंज भी सुल्तान मोहम्मद सानी को विरासत में मिल गया लेकिन ये बोहोत मुश्किल चेलेंज था तख्तो ताज मिलने से भी ज्यादा मुश्किल था.

कुस्तुन्तुनिया का इतिहास

कुस्तुन्तुनिया की स्थापना रोमन सम्राट् कांस्टैंटाइन ने 328 ई. में प्राचीन नगर बाईज़ैंटियम को विस्तृत रूप देकर की थी।

रोमन साम्राज्य की राजधानी के रूप में इसका आरंभ 11 मई 330 ई. को हुआ था।

कहते हैं कि जब यूनानी साम्राज्य का विस्तार हो रहा था तो प्राचीन यूनान के नायक बाइज़ैस ने मेगारा नगर को बाइज़ैन्टियम के रूप में स्थापित किया था,यह बात 667 ईसापूर्व की है.

उसके बाद जब कॉंस्टैन्टीन राजा आए तो इसका नाम कॉंस्टैंटिनोपल रख दिया गया जिसे हम कुस्तुन्तुनिया के रूप में पढ़ते आए हैं. यही आज तुर्की का इस्ताम्बुल शहर है.

क़ुस्तुन्तुनिया कभी हार का मुंह ना देखने वाला शहर माना जाता था जो आज भी मूल्यवान कलात्मक‚ साहित्यिक और ऐतिहासिक धरोहरों से मालामाल समझा जाता है, 12 मीटर उंची दिवारों से घिरे इस शहर को भेदना उस समय किसी के लिए मुमकिन नही था। जिसके 3 तरफ दरिया ओर एक तरफ खुश्की

कुस्तुन्तुनिया ओर हुजूर सल्लल्लाहु त’आला अलेह वसल्लम का फरमान

तारीख की अज़ीम जंग कुस्तुन्तुनिया⚡⚔️

👑🇹🇷कुस्तुन्तुनिया ओर हुजूर सल्लल्लाहु त’आला अलेह वसल्लम का फरमान🇹🇷👑

🇹🇷कुस्तुन्तुनिया की फतह इस्लाम मे किया अहमियत रखती हे,ओर क्यों सुल्तान मोहम्मद फातेह ओर दीगर मुस्लिम सुल्तान इसको फतह करना चाहते थे

एक हदीस जो बुखारी की बोहोत मशहूर हे , पेस कर रहा हु , साथ ही इस हदीस से लोगो को धोका देने वालो को भी बे-नकाब करूंगा

उम्मे हराम रदिअल्लाहु अन्हा बयान करती हे कि मैने नबी ए करीम ﷺ से सुना हे आप ﷺ ने फरमाया था के मेरी उम्मत का सबसे पहला लश्कर जो दरया ए सफर करके जिहाद के लिए जाएगा उसने अपने लिए अल्लाह की रहमतो मगफिरत वाजिब करली ,इसपे उम्मे हराम रदिअल्लाहु अन्हा कहा मेने पूछा या रसूल अल्लाह ﷺ किया में भी उनके साथ होगी ❓ आप ﷺ ने फरमाया के हा, तुम भी उनके साथ होगी

फिर नबीए पाक ﷺ ने फरमाया सबसे पहला लश्कर मेरी उम्मत का जो क़ैसर (रोम) के शहर पर हमला करेगा उनकी मगफिरत होगी,
मेने कहा या रसूल अल्लाह में भी उनके साथ होंगी आप ﷺ ने फरमाया के नही.

📖सही बुखारी किताबुल जिहाद पेज नम्बर 113 हदीस न 2924

इस शहर के लिए जो पहला लश्कर हमले के लिए गया जिसको जन्नत की बसारत थी वो 44 हिजरी में हज़रत अब्दुल रहमान इब्ने खालिद इब्ने वलीद رضي الله عنه लेकर गए थे

इसकी दलील में एक रिवायत पेस करदु

अस्लम अबु इमरान फरमाते हे हम मदीना ए मुनव्वरा से ज़िहाद का इरादा कर कुस्तुन्तुनिया निकले उस वक़्त अब्दुल रहमान इब्ने खालिद इब्ने वलीद رضي الله عنه हमारे लश्कर के सिपाह सालार थे
वहा हजरत अबु अय्यूब अंसारी رضي الله عنه ने हमे क़ुरआन की आयत (सूराह बकरा आयत 2 की आयत के माने समझाए)
अस्लम अबु इमरान फरमाते हे हज़रत अबु अय्यूब अंसारी कुस्तुन्तुनिया में जिहाद करते रहे करते रहे हत्ता के आप का इन्तिक़ाल हो गया,

📖(सुनन अबु दाऊद जिल्द 3 पेज 211किताबुल जिहाद )

इससे साफ हो गया कि हुजूर ﷺ ने जिस पहले लश्कर को जन्नत की बसारत दी थी वो 44 हिजरी में चला गया था.

आजकल एक फिरका नाम निहाद अहले हदीस वहाबी वो इस बुखारी की हदीस को जो मेने उपर पेश की हे, उस हदीस से अपने अब्बा यज़ीद को जन्नती साबित करते हे ओर अवाम को धोका देते हे, जबकि हदीस के अल्फ़ाज़ साफ हे सबसे पहला लश्कर मेरी उम्मत का केसर के शहर पर हमला करेगा उनकी मगफिरत होगी

⚔️(1)ओर मेने दूसरी हदीस से बता दिया पहला लश्कर 44 हिजरी में गया अब्दुल रहमान इब्ने खालिद इब्ने वालिद رضي الله عنه जिसके सिपाह सालार थे और हज़रत अबु अय्यूब अंसारी رضي الله عنه सामिल थे.

⚔️(2) फिर दूसरा लश्कर 49 हिजरी में सुफ़यान इब्ने ओफ़ की कयादत में एक लश्कर अमीरे माविया رضي الله عنه ने भेजा ।उसमे भी यज़ीद नही गया.

⚔️(3) तीसरा लश्कर जिसमे हज़रत अबु अय्यूब अंसारी رضي الله عنه का इन्तिक़ाल हुवा वो 52 हिजरी में गया था , जिसमे बाद में अमीरे माविया رضي الله عنه ने यज़ीद को बतौरे सजा भेजा था.

इस हदीस में फ़ज़ीलत ओर बसारत पहले लश्कर के लिए हे इस लिए ये हदीस को बेस बना के यज़ीद को जन्नती साबित करना और यज़ीद को जन्नती कहना धोके के अलावा कुछ नही,,जो लोग ऐसा कहते हे वो झूठे मक्कार हे।

हमारा टॉपिक ये नही है इस लिए मुक्तसर में आपको बता दिया नही तो ओर दलीलों से साबित कर सकता हु,।

⚔️कुस्तुन्तुनिया पे कितनी बार हमले हुवे⚔️👇🏻👇🏻

इस शहर को फ़तह करने की कोशिश 559 ई. मे ही शुरु हो गई थी.

🗡️(1) सबसे पहले नाकाम कोशिश 559 ई में कुट्रिगर्स(Kutrigurs) ने की.

🗡️(2)फिर 626 मे ससैनियन(Sasanian Empire) ने भी हमला किया और नाकाम हुए.

🗡️(3) फिर आया इस्लाम का दौर, इस मे दो बार कुस्तुन्तुनिया का मुहासिरा किया गया जिसमे हज़रत अबु अय्यूब अंसारी रदिअल्लाहु अन्हु ख़ुद शरीक हुए, लेकिन फतह न हो सका.

🗡️( 4)813 मे बुलगारिया के क्रुम मे हमला किया और नाकामयाब हुए.

🗡️(5) इसके बाद 860 से 941 के बीच रुस ने इस शहर पर तीन बड़े हमले किए पर नाकामयाब हुए.

🗡️(6) फिर 1203 और 1204 मे धोखे से क्रुसेडर ने इस शहर पर हमला कर लिया और ख़ुब लुट पाट किया और इसे Empire of Romania यानी लातिनी के हवाले कर दिया जिसे (SackofConstantinople) के नाम से जाना गया पर 25 जुलाई 1261 मे इसे Empire of Nicaea द्वारा वापस हासिल कर लिया गया जो Byzantine Empire का ही हिस्सा था ..

🗡️(7)इस के लिए 1235 मे बुलगारियन और निकाया ने मिल कर एक नाकामयाब हमला किया था..

🗡️(8) फिर 1248 से 1261 के बीच मे Nicaea ने एक एक कर तीन बार नाकामयाब हमला किया..और आख़िर 25 जुलाई 1261 को बिना लड़े ही जीत हासिल कर लिया क्योंके इन्हे रोकने वाला कोई था ही नही.. इसके बाद इस शहर की ज़बर्दस्त क़िलेबंदी हुई..

फिर उस्मानीयों का दौर आया जो बड़ी तेज़ी से युरोप मे घुसे जा रहे थे पर उनके रास्ते के बीच कुस्तुन्तुनिया पड़ रहा था जिसे जीतना बहुत ज़रुरी था.

🪓(9) सुल्तान बायज़ीद के दौर मे 1390 से 1402 के इस शहर का मुहासरा हुआ पर तैमुर की वजह से नाकामयाबी हाथ लगी, फिर

🪓(10) 1411 मे हमला किया गया और एक बार फिर नाकामयाबी हाथ लगी ,

🪓(11) 1422 सुल्तान मुराद सानी ने एक बार फिर मुहासरा किया, फिर नाकामयाबी हाथ लगी, वापस लौटना पड़ा …

🪓(12) फिर उनके बेटे सुल्तान मुहम्मद फातेह गद्दी पर बैठे और सिर्फ़ 21 साल की उमर मे उन्होंने इस शहर का मुहासरा किया

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